बेगूसराय में माले नेताओं की हत्या के पीछे प्रशासन व भाजपा संरक्षित सामंती-अपराधियों का नापाक गठजोड़

सामंती-अपराधियों से मिल रही धमकियों की लगातार शिकायत के बावजूद माले नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार व प्रशासन ने दिखलाई आपराधिक उदासीनता
माले विधायक सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में माले की तीन सदस्यीय राज्यस्तरीय जांच टीम ने किया घटना स्थल का दौरा.
हत्यारों को गिरफतार करने, बलिया डीएसपी रंजन कुमार को बर्खास्त करने, मृतक परिजनों को 10 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी देने की मांग
26 मार्च को बेगूसराय बंद का आह्वान, पूरे राज्य में होगा प्रतिवाद

22 मार्च 2016

बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड में 21 मार्च की शाम में भाकपा-माले के दो नेताओं क्रमशः महेश राम (उम्र-25 वर्ष) व रामप्रवेश राम (उम्र-27 वर्ष) की बर्बर तरीके से हत्या के पीछे प्रशासन व भाजपा संरक्षित सामंती-अपराधियों का नापाक गठजोड़ है. भूमि आंदोलन को लेकर हमारी पार्टी के नेताओं को बार-बार सामंती ताकतों से धमकियां मिल रही थीं. कुछ दिन पहले ही इस घटना के नामजद अभियुक्तों ने ही उन पर जानलेवा हमला किया था. हमारे नेताओं ने इसकी लिखित शिकायत डीएसपी, एसपी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी की थी. लेकिन सरकार व प्रशासन ने इस मामले में आपराधिक किस्म की चुप्पी बरती और उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया. उलटे बलिया डीएसपी रंजन कुमार ने सभी अपराधियों को बरी कर दिया, जिसका नतीजा है कि आज हमारे दो नेताओं को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है.
‘न्याय के साथ विकास’ का ढोंग करने वाली नीतीश सरकार ने महादलितों का खून बहाने के लिए सामंती-अपराधियों को खुला छोड़ दिया है. कुछ दिन पहले भी भोजपुर में काॅ. राजेन्द्र महतो व सिवान में काॅ. संजय चैरसिया की बर्बर तरीके से हत्या कर दी गयी थी. नवादा जिले के अकबरपुर के कझिया गांव में 60 दलित बस्तियों में आग लगा दी गयी थी, बावजूद नीतीश की सरकार ने अब तक अपराधियों पर कोई कार्रवाई नही ंकी, जिसके कारण इन ताकतों का मनोबल लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इसके खिलाफ आगामी 26 मार्च को बेगूसराय बंद और पूरे राज्य में प्रतिवाद का आयोजन किया जाएगा. उक्त बातें माले के राज्य सचिव कुणाल ने कही.
उन्होंने कहा कि बेगूसराय में दो पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या की खबर मिलने के उपरांत आज सुबह माले विधायक सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया. उच्चस्तरीय टीम में उनके साथ किसान महासभा के नेता काॅ. उमेश सिंह और खेग्रामस नेता गोपाल रविदास शामिल थे.
जांच टीम के हवाले से काॅ. सुदामा प्रसाद ने कहा कि सामंती-अपराधियों ने मध्ययुगीन बर्बरता के साथ हमारे कामरेडों की हत्या की है. 21 मार्च की शाम 6 बजे जब वे बलिया बाजार से अपने गांव मकसुदनपुर लौट रहे थे, पहले से घात लगाकर बैठे अपराधियों ने उनकी बर्बर तरीके से हत्या कर दी. उन्होंने हमारे साथियों के चेहरे पर आधा दर्जन गोलियां चलाईं, जिससे उनका चेहरा पूरी तरह विकृत हो गया. स्थिति ऐसी थी कि लाश को पहचान पाना मुश्किल था.
माले नेता ने बताया कि दरअसल, इन दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में अपने गांव में भूमि आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था, जिसके कारण वे सामंती ताकतों की आंखों के किरकरी बने हुए थे. 1980-81 में गांव के तकरीबन 134 परिवारों को 120 एकड़ 68 डिसमिल जमीन का पर्चा मिला था. नवंबर 2015 में पहले जिलाधिकारी और फिर हाईकोर्ट से 100 एकड़ जमीन पर गरीबों की जीत हुई. लोग उसपर खेती करने लगे थे और कुछ दिन पहले ही सामंती वर्चस्व को धत्ता बताते हुए गरीबों ने उस जमीन की फसल काट ली थी. शेष 20 एकड़ का संघर्ष जारी था. गरीबों की इस बढ़ती दावेदारी से सामंती ताकतों में बौखलाहट थी और वे अक्सर हमारे नेताओं को जान से मार देने की धमकी देते थे.
माले नेताओं ने आगे कहा कि एक तरफ जहां ‘न्याय के साथ विकास’ का दावा करने वाली नीतीश सरकार में हमारे नेताओं व आंदोलनकारियों की सुरक्षा में आपराधिक चुप्पी बरती गयी, तो दूसरी ओर, काॅ. महेश राम व रामप्रवेश राम की जघन्य हत्या के खिलाफ आंदोलित जनता पर बर्बर तरीके से लाठीचार्ज करने से भी प्रशासन बाज नहीं आई और महिलाओं-बच्चों पर लाठियां बरसाते हुए कामरेडों का शव जबदरस्ती उठा कर लेते गयी. यह साफ तौर पर दिखलाता है कि नीतीश सरकार सामंती ताकतों के पक्ष में खड़ी होकर जनांदोलनों व आंदोलनकारियों को कुचलने पर आमदा है.
सरकार व जिला प्रशासन के रवैये से नाराज हजारों की संख्या में पार्टी समर्थकों ने सदर अस्पताल से अपने प्रिय कामरेडों के शव के साथ बेगूसराय शहर में मार्च किया और जिलाधिकारी के मुख्य गेट को जाम कर दिया. जिसके दबाव में जिलाधिकारी व एसपी वार्ता को तैयार हुए. माले विधायक सुदामा प्रसाद ने वार्ता में सभी नामजद अभियुक्तों की तत्काल गिरफ्तारी, माले नेताओं व महादलित परिवार की सुरक्षा में आपराधिक लापरवाही बरतने वाले डीसपी रंजन कुमार की बर्खास्तगी, मृतक के परजिनों को 10 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी तथा महादलित परिवारों की सुरक्षा की गारंटी की मांग की. तत्काल ऐसा न होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी.
नामजद अभियुक्तों में बलिया प्रखंड के मकसुदनपुर गांव के ही 1. सुरेन्द्र चैधरी, पिता-बनारसी चैधरी 2. जितेन्द्र चैधरी, पिता-काको चैधरी 3. विजल चैधरी, पिता-चंद्रभूषण चैधरी, 4. छोटेलाल चैधरी, पिता-शंकर चैधरी 5. घुटर चैधरी, पिता- बउकु चैधरी, 6. हिम्मत चैधरी, पिता-देवेन्द्र चैधरी 7. देवेन्द्र चैधरी, पिता-रामाधीन चैधरी 8. हरेराम चैधरी, पिता-भूना चैधरी 9. मनोरंजन चैधरी, पिता- गणेश चैधरी 10. दीपो चैधरी, पिता – अशरफी चैधरी 11. ललन चैधरी, पिता-रामानंद चैधरी तथा मंुगेर जिला के दो लोग संजय चैधरी, पिता रमापति चैधरी व रंजीत चैधरी, पिता भोला चैधरी के नाम शामिल हैं.
कुमार परवेज
कार्यालय सचिव, भाकपा-मालेBegusarai.jpg

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s